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    जग्गी मर्डर केस हाई कोर्ट में फिर से खुला; 1 अप्रैल को आखिरी सुनवाई

    Raftaar ChhattisgarhBy Raftaar ChhattisgarhMarch 25, 2026Updated:March 26, 2026No Comments4 Mins Read
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    जग्गी मर्डर केस हाई कोर्ट में फिर से खुला; 1 अप्रैल को आखिरी सुनवाई

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिओपन हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सतीश जग्गी ने अपना पक्ष रखा। डिवीजन बेंच ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख तय की है, जिसमें सीबीआई, राज्य सरकार और अमित जोगी अपना पक्ष रखेंगे।

    इस मामले में अमित जोगी ने कहा है कि हाईकोर्ट एक अप्रैल को मेरी बरी होने के दो दशक पुराने फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करेगी। मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कहता हूं कि अब तक ईश्वर मेरे साथ रहा है और आगे भी रहेगा। सत्य की जीत अवश्य होगी। जीवन से मैंने एक बात सीखी है कि जो लोग ईश्वर पर भरोसा रखते हैं वे हमेशा आगे बढ़ते हैं और सफल होते हैं। आप सभी से सिर्फ एक ही निवेदन है कि मुझे और मेरे परिवार को अपनी प्रार्थनाओं और आशीर्वाद में याद रखें। आपकी प्रार्थनाएं ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
    दरअसल, डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके। हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। तब सीबीआई ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।

    2003 में हुई थी एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या

    4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।

    तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या: सतीश जग्गी

    हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब सीबीआई की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा, इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।

    जानिए कौन थे रामावतार जग्गी  

    कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बना दिया था।

    ये पाए गए थे दोषी  


    जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे

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