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शराब घोटाले में सौम्या चौरसिया को जमानत लेकिन शर्तों ने बढ़ाई मुश्किलें

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शराब घोटाले में सौम्या चौरसिया को जमानत लेकिन शर्तों ने बढ़ाई मुश्किलें

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तत्कालीन उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को जमानत दे दी है। हालांकि यह राहत पूरी तरह आसान नहीं है, क्योंकि अदालत ने कुछ सख्त शर्तें भी लगा दी हैं। इसके चलते उन्हें तुरंत जेल से बाहर आना संभव नहीं होगा ।
सौम्या चौरसिया पहले कोयला घोटाले में गिरफ्तार हुई थीं।लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। लेकिन दो महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शराब घोटाले में फिर से गिरफ्तार कर लिया। इसी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। शुरुआत में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई जाए और उस पर प्राथमिकता से सुनवाई की जाए।

इसके बाद सौम्या ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर कीं । हाल ही में एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, लेकिन अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में फैसला देने को कहा है, इसलिए देरी नहीं हो सकती। 20 फरवरी को अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था । सौम्या के वकील हर्षवर्धन परगनिहा के अनुसार, ईडी एक्ट की धारा 45 के तहत अदालत ने माना कि मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में उनकी संलिप्तता प्रथम दृष्टया साबित नहीं होती। इसलिए ईडी मामले में उन्हें जमानत दी गई है। लेकिन ईओडब्ल्यू ने शर्त रखी है कि उन्हें उसी दिन जमानत मिलेगी, जिस दिन इस मामले में चार्जशीट पेश होगी। वकील के मुताबिक, आज से लगभग 45 दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकेगी।

ईडी की जांच में दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में करीब 3200 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कथित घोटाला तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक सिंडिकेट के जरिए संचालित हुआ । जांच में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नाम सामने आए हैं। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क का नेतृत्व चैतन्य बघेल कर रहे थे और करीब 1000 करोड़ रुपये का लेन-देन उनके जरिए हुआ । सौम्या के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि केंद्रीय और राज्य एजेंसियां बार- बार नए एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर रही हैं, जो एक राजनीति साजिश का हिस्सा है। याचिका में कहा गया कि अबतक उन्हें छह बार हिरासत में लिया जा चुका है।

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