तौलीपाली में गौमाता कथा शुरू,भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ…
Gau Mata Katha कोरबा।तौलीपाली में पांच दिवसीय गौमाता कथा यज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। इस अवसर पर गॉंव में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर सहभागिता की। यह यात्रा महादेव चौक से शुरू होकर रामसागर तालाब से जल लेकर पुनः कथा स्थल पर समाप्त हुई।श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे,इस दौरान नन्हे बच्चों और युवाओं में भी विशेष उत्साह देखा गया।

30 अप्रैल से 5 मई तक होगी कथा
यह गौमाता कथा 30 अप्रैल से 5 मई 2026 तक चलेगी। इसमें कथा व्यास याचिका किशोरी आँचल गोस्वामी जी अपने मधुर प्रवचनों से श्रद्धालुओं को गौमाता कथा का वर्णन करेंगे। कथा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन का लाभ उठाएं।
आइए जानें कलश यात्रा का महत्व
सनातन धर्म में कथा यज्ञ का विशेष महत्व होता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं यही बल्कि आध्यात्मिक जागरण और भक्ति का सार भी है। किसी भी कथा यज्ञ के शुभारंभ से पहले कलश यात्रा निकालने की परंपरा होती है, जो पूरे आयोजन को शुभता प्रदान करती है। कलश यात्रा के दौरान महिलाएं सिर पर कलश धारण कर भक्ति भाव में सराबोर होकर लाल और पीले रंग के वस्त्रों में शोभायात्रा निकालती हैं। इस यात्रा में भक्तगण भजन-कीर्तन करते हुए कथा स्थल तक पहुंचते हैं, जिससे वातावरण भी भक्तिमय हो जाता है। कलश यात्रा को पवित्रता, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकेत का प्रतीक माना जाता है। यह यात्रा देवी-देवताओं का आह्वान करने के साथ-साथ आस-पास के वातावरण की शुद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। शास्त्रों की मानें तो कलश का पानी जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन का आधार है। इसे भगवान विष्णु का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए भागवत कथा से पहले कलश यात्रा निकालना अत्यंत शुभ होता है।
















































